प्रकृति की सुंदरता
प्रकृति की सुंदरता
हरी-भरी धरती का आँचल,
फूलों से महके हर पल।
नीला-नीला नभ मुस्काए,
सूरज सुनहरी किरणें लाए।
पर्वत ऊँचे, शांत खड़े हैं,
बादल उनके संग जुड़े हैं।
झरने गाते मधुर तराने,
नदियाँ बहतीं गीत सुनाने।
पेड़ों पर चिड़ियाँ चहकतीं,
फूलों पर तितलियाँ मंडरातीं।
मंद पवन जब पास से आए,
मन में मीठी खुशबू भर जाए।
सुबह-सुबह ओस की बूँदें,
मोती जैसी लगतीं सुंदर।
सांझ ढले जब सूरज सोता,
आकाश सुनहरा रंग संजोता।
बारिश आती रिमझिम-रिमझिम,
धरती होती शीतल और नम।
काली घटा जब नभ पर छाती,
मोरों की टोली नाच दिखाती।
प्रकृति माँ का रूप निराला,
इससे सुंदर जग में क्या भला?
वह देती है अन्न और पानी,
जीवन की हर नई कहानी।
पेड़ हमें देते हैं छाया,
फल, फूल और शुद्ध हवा।
नदियाँ देतीं जल अनमोल,
प्रकृति है जीवन का मूल।
लेकिन मानव भूल रहा है,
अपने घर को खुद जला रहा है।
पेड़ काटकर, नदियाँ गंदा कर,
वह भविष्य को रहा बिगाड़।
आओ मिलकर शपथ उठाएँ,
धरती को हम स्वच्छ बनाएँ।
अधिक पेड़ हर वर्ष लगाएँ,
जल और जंगल को बचाएँ।
पक्षी, पशु सब रहें सुरक्षित,
धरती हो सुंदर और संरक्षित।
प्रकृति बचेगी, जीवन खिलेगा,
हर आँगन खुशियों से भरेगा।
धरती हमारी माँ के जैसी,
इसकी रक्षा सबसे जरूरी।
प्रकृति का सम्मान करेंगे,
सुखमय जीवन हम पाएँगे।
हरी धरा मुस्काती जाए,
नीला गगन गीत सुनाए।
प्रकृति का यह अनुपम उपहार,
रहे सदा सुंदर संसार।