दिल-ए-नज़राना
रूह काँपता तेरे दर्शन मिलते ही,
दिल की धड़कने हो जाती तेज़।
दिल से निकली एक आवाज,
प्यारा सा लगने लगा तेरा ये अंदाज़।
कहना तो है तुझे दिल-ए-बाते,
क्या कहेंगे लोग सिर्फ यही सोचते रह गए।
आज भी आते हैं आंसू नैनों से,
एहसास करवाता है क्यों ये प्यार हुआ मुझसे।
देखते ही थम जाती थी चिंता मेरी,
आज देखकर तुझे याद आती मुझे पहले नज़राने हमारी।
काश! ये दिल समझ पाता कि हारना नहीं है तुझ पर,
तो आज ये दिल को दर्द ना झेलना पड़ता फिर।
तुझे देख कर याद आती है हमारी दोस्ती,
कहीं प्यार करते-करते ना भूल जाए पहले वाली दोस्ती।