रिश्ता तोड़ न जाना

ग़ज़ल

सुना है आज भी बारिश है, मगर तुम भीग न जाना,

मेरी यादों की नमी को अश्क समझ लीग न जाना।

अगर बादल कभी दिल की सदा बनकर बरस जाएँ,

किसी भी दर्द को दुनिया के आगे चीख न जाना।

ग़लतफ़हमी की आँधी घर उजाड़ा करती है अक्सर,

किसी अफ़वाह के कहने से रिश्ता तोड़ न जाना।

बहुत नाज़ुक है ये एहसास, शीशे से भी ज़्यादा,

किसी लम्हे की ख़ता पर उम्र भर रूठ न जाना।

मिलें जो राह में काँटे, उन्हें तक़दीर मत कहना,

सफ़र मुश्किल सही, लेकिन कहीं तुम रुक न जाना

सुशील कुमार ‘बाबरा’

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Sushil Kumar 'Babra'