Chak Chumban Hindi Samajik Sahitya

Chak Chumban (Second Edition)

by Santosh Singh Rakh

249.00

E-Book Price ₹199 / $2.99

Genre ,
ISBN 9789358960525
Languages Hindi
Pages 178
Cover Paperback
E-Book Available

चाक चुम्बन (दूसरा अध्याय)

“चाक चुम्बन” समाज और व्यवस्था की उन विसंगतियों पर केंद्रित एक वैचारिक अभिव्यक्ति है, जहाँ आम व्यक्ति स्वयं को उपेक्षित, असहाय और व्यवस्था का शिकार महसूस करता है। यह उन लोगों की आवाज़ है जो सामाजिक और प्रशासनिक तंत्र के बीच अपनी पहचान और अधिकार खोते चले जाते हैं।

पुस्तक में समाज की बीमार होती व्यवस्था, संवेदनहीनता, जातिगत द्वेष, धार्मिक उन्माद तथा अवसरवादी मानसिकता पर भावात्मक, विवरणात्मक और आलोचनात्मक दृष्टि प्रस्तुत की गई है। लेखक अपनी रचनाओं के माध्यम से पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करते हैं तथा सामाजिक चेतना और परिवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

“राख” और अन्य रचनाओं के माध्यम से यह पुस्तक आधुनिक समाज की संवेदनहीनता, संघर्ष और आंतरिक पीड़ा को अभिव्यक्त करती है। लेखक का उद्देश्य केवल आलोचना करना नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करना और नई पीढ़ी में विचार, साहस और उत्तरदायित्व की भावना का संचार करना है।

“चाक चुम्बन” समकालीन समाज, व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित एक विचारोत्तेजक कृति है, जो पाठकों को प्रश्न पूछने, सोचने और समाज के प्रति अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करती है।

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