Views 444विश्वास। और यही विनाश का आगाज हैन कोई डर हैं न कोई लाज हैं। सपनों के पैरों तले रखे हैं क्या होगा परिणाम ललाट पर लिखी है विजय पाने का राज लेकिन किन्हीं मामूली बातों में फंसकर खो रहा हूॅं मन का विश्वास। Related Leave a ReplyCancel reply