कुछ सच, कई सपने Kuch Sach Kai Sapne - ZorbaBooks
Ashutosh Mundkar,

कुछ सच, कई सपने Kuch Sach Kai Sapne

by आशुतोष मुंडकु र - आशना

175.00

E-Book Price ₹99 / $2.99

Genre ,
ISBN 9789390011728
Languages Hindi
Pages 102
Cover Paperback
E-Book Available

Description

कु छ सच, कई सपने
कुछ काव्य रचनाएँ

By

Ashutosh Mundkar

धीरे-धीरे यूं फ़ासले बढ़ते गए ,
हम रहे वहीं के वहीं, और वो चलते गए |

किस्सा था वो या कोई हादसा याद नहीं,
हम सुनते रहे वो सुनाते गए |

पांसा फे का हमने तो , उनके दामन में जा गिरा ,
हम बाज़ी हारते रहे , वो दामन चुराते रहे |

कई हैं, जो तुमको कहते हैं अपना ‘आशना’,
दोस्त ही तो हैं सब तुम्हारे, तुम किस को ढूँढने गए |
धीरे-धीरे

 

आशुतोष मुंडकुर “आशना” Ashutosh Mundkur अपनी कविताएँ , नज्म और गज़लें कई वर्षों से लिखते आ रहे हैं । जेनेटिक इन्जीनियरिंग में डाक्टरेट हासिल करने के बाद, पिछले तीस वर्षों से ये स्वास्थ्य संबधित व्यवसाय से जुड़े हैं | वेअभी एक जापानी कं पनी में
उच्च स्तर पर कार्यरत हैं ।
दक्षिण भारतीय होने के बावजूद इनकी रुचि हिन्दी और उर्दू भाषा में रही है | मूलतः ये मंगलुरु के हैं और इनकी मातृभाषा कोंकणी है। हिन्दी, उर्दू के अलावा ये कई अन्य भाषाएं बड़ी कु शलता से बोल लेते हैं। आशुतोष की प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा उत्तर और मध्य भारत में वाराणसी, इंदौर और मेरठ में हुई है l शायद इसका असर इनकी रुचि में प्रतीत होता है

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