Poetry front page

Pathik Chup Chap

by Bimal Baduni

199.00

Genre ,
ISBN 9789385020155
Languages Hindi
Pages 246
Cover Paperback

Description

अब दिन  ढलने को है
क्षितिज फिर लाल होने को है
पराजित फिर धरा
छाती फिर तम की कजली
दिन भर के सफ़र से
मेरी सोच है बदली
ढलते सूरज की लाली
अब ढाढ़स बढाती है
डूबना भी नियति है
समझाती है |
मै फिर सोच में हूँ
कल का सूरज
कैसा   दिखेगा ?
कुछ गाढ़े  रक्त जैसा
धरती को सहेजने में लगा
लहू बहाता सा
या बादलों की ओट में छिपा
गुनगुना अहसास दिलाता |
मुझे इंतजार रहता है
सोचने का तपने का
सूरज के उगने का
और फिर
सूरज के ढलने का…………….|

 

About The Author

विंग कमांडर बिमल वरन बडूनी भारतीय वायु सेना के भूतपूर्व हेलीकाप्टर पायलट हैं | वायु सेना मे काम करते हुए उन्होने अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है | वायुसेना से अवकाश लेने के उपरांत वर्तमान मे वे पवनहंस हैलिकौप्टर्स मे कार्यरत हैं | लगभग दस हजार घंटों का उड़ान अनुभव एक पायलट के रूप मे उनकी व्यस्तता को दर्शाता है | फिर भी कविताओं के प्रति रुझान उन्हे हिन्दी तथा अँग्रेजी दोनों भाषाओं मे लिखने को प्रेरित करता रहा है | पथिक चुपचाप उनका प्रकाशित होने वाला पहला कविता संग्रह है |

Also Available on:

Flipkart Amazon InfiBeam URead