Himanshu Kumar jhaPoem 449सुलझे हुए जिंदगी उलझे हुए हैं हम।(STUDENT REAL STORY)ख़ूबसूरत सी दुनिया सहमे हुई हम बिख़रेRead More...
Himanshu Kumar jhaPoem 510मैंन पापा से बड़ा संसार ना मांगूंगामैंन पापा से बड़ा संसार ना मांगूंगा।Read More...
Himanshu Kumar jhaPoem 664टूटे हुए हैं पंख तो क्या हुआ हौसला नहीं हारी हैं।टूटे हुए हैं पंख तो क्या हुआRead More...
Himanshu Kumar jhaPoem 431एकांत सा जीवन चाहिए एकांत सा जीना चाहता हूँ।खामोशी आ गई हैं मुझमें मैं अपनेRead More...
Himanshu Kumar jhaPoem 379हे प्रिये मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूॅं तुम भी प्यार करो न।।हे प्रिये मैं तुम्हें बहुत प्यार करताRead More...