मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 252मूर्धन्य’ जीवंतता का वह……मूर्धन्य’ जीवंतता का वह प्रथम लक्ष्य। सहजताRead More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 304प्रेम रस” मंजिल सुधी रखूं सहेज……….प्रेम रस” मंजिल सुधी रखूं सहेज। मर्यादाRead More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 204अंधकार” मोह का जाल हृदय में लिपटा”……..अंधकार” मोह का जाल हृदय में लिपटा”Read More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 307अति गाढो चटकारो है प्रीति को रंग’…..श्रृंगार” रस कविता अति गाढो चटकारो हैRead More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 279वेदना’ हृदय पर घात करे’ प्रतिघात करें…..वेदना’ हृदय पर घात करें’ प्रतिघात करेंRead More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 421कहता हू’ किंचित समाधान भी होगा……कहता हूं’ किंचित समाधान भी होगा। मनRead More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 289कटीले तेरे नैना” अरी ओ भामिनी……श्रृंगार रस कविताकटीले तेरे नैना” अरी ओ भामिनी। मदभरेRead More...