मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 332हे रघुनाथ, दास तुम्हारा हूं…….हे रघुनाथ, दास तुम्हारा हूं, हे असुरRead More...
Vibha joshiPoem 180‘एक गृहनी का सपना,’ एक प्यारा सा आँगन हो मेरा , . *जहा बच्चे की किलकारी का हो डेरा,.* बुजुर्ग को के आशीर्वाद से हो सुबह मैरी, *पति के संग स चाय से हो मैरी साम पूरी,… *इन सब के साथ मुझे पँख खोलने का दो एक मौका, *मेरी कॅरियर की उड़ान को ना जाए रोका,* कूछ खास बनके दिख ला ने का हैँ मेरा भी सपना, *ये वादा हैँ मेरा अपना.. 🙏🏻यही हैँ एक गृहनी का सपना‘एक गृहनी का सपना,’ एक प्यारा सा आँगनRead More...
Mohammed Zahoor KhanPoem 43525 hazar ki naukri magar sukoon zara bhi nahin25 hazar ki naukri magar sukoon zaraRead More...