मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 342भजन करुं तेरो, मेरे हृदय बसो हे राम……भजन करूं तेरो, मेरे हृदय बसो हेRead More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 401उन्मत होना’ पथ पर ध्येय नहीं……..उन्मत होना’ पथ का ध्येय नहीं। मानवRead More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 308अधिक तीव्र प्रज्वलित किए आशा के दीप…..अधिक तीव्र’ प्रज्वलित किए आशा के दीप”Read More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 338मूर्धन्य’ जीवंतता का वह……मूर्धन्य’ जीवंतता का वह प्रथम लक्ष्य। सहजताRead More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 425प्रेम रस” मंजिल सुधी रखूं सहेज……….प्रेम रस” मंजिल सुधी रखूं सहेज। मर्यादाRead More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 289अंधकार” मोह का जाल हृदय में लिपटा”……..अंधकार” मोह का जाल हृदय में लिपटा”Read More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 422अति गाढो चटकारो है प्रीति को रंग’…..श्रृंगार” रस कविता अति गाढो चटकारो हैRead More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Blog Articles 325हथियारों की होड़ ….आपस में संघर्ष और अहं का टकराव……आज चर्चा करेंगे हथियार और युद्ध की।Read More...
मदन मोहन'मैत्रेय'Poem 423वेदना’ हृदय पर घात करे’ प्रतिघात करें…..वेदना’ हृदय पर घात करें’ प्रतिघात करेंRead More...